पीएम मोदी के चीन दौरे से अमेरिकी राष्ट्रपति को बड़ा झटका…. तीन महाशक्तियाँ आई एक साथ !

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चीन दौरे को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज़ हो गई है। माना जा रहा है कि इस कदम से अमेरिका की रणनीतिक बढ़त को चुनौती मिली है। विशेषज्ञों का कहना है कि मोदी का यह दौरा भारत-चीन संबंधों को नई दिशा दे सकता है, जिससे अमेरिकी राष्ट्रपति की Indo-Pacific नीति को बड़ा झटका लग सकता है।

भारत और अमेरिका के बीच बढ़ता टकराव

भारत और अमेरिका के रिश्तों में तनाव की स्थिति देखने को मिल रही है। हाल के कूटनीतिक और रणनीतिक फैसलों के चलते दोनों देशों के बीच मतभेद सामने आए हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले दिनों में यह टकराव वैश्विक राजनीति और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर असर डाल सकता है।

भारत और चीन के बीच व्यापारिक रिश्तों पर नज़र

भारत और चीन के बीच व्यापार लगातार चर्चा का विषय रहा है। हालाँकि सीमा विवाद और राजनीतिक तनाव अक्सर रिश्तों को प्रभावित करते हैं, लेकिन आर्थिक स्तर पर दोनों देशों का व्यापार साल दर साल बढ़ता रहा है। भारत चीन से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक सामान, मशीनरी और रसायन आयात करता है, जबकि चीन भारत से लोहा, खनिज और कृषि उत्पाद खरीदता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह आर्थिक जुड़ाव दोनों देशों के लिए लाभकारी होने के साथ-साथ चुनौतीपूर्ण भी है।

भारत और रूस के बीच बढ़ता व्यापारिक सहयोग

भारत और रूस के बीच व्यापारिक रिश्ते हाल के वर्षों में काफी मज़बूत हुए हैं। रूस से भारत मुख्य रूप से कच्चा तेल, गैस, रक्षा उपकरण और उर्वरक आयात करता है, जबकि भारत रूस को दवा, कृषि उत्पाद, चाय, कॉफी और मशीनरी निर्यात करता है।
यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बीच भारत रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदकर सबसे बड़े आयातकों में शामिल हो गया है। इससे दोनों देशों का व्यापारिक संतुलन नई ऊँचाइयों पर पहुँचा है।

👉 मुख्य बिंदु:

  • भारत रूस से तेल और रक्षा उपकरण का सबसे बड़ा खरीदार।

  • रूस के लिए भारत एक भरोसेमंद निर्यात बाज़ार।

  • दोनों देश लंबे समय से रणनीतिक साझेदार।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *