अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमला दो हप्तों के लिए क्यों टाला ?

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले को दो हफ्ते के लिए टालने का फैसला कुछ ठोस रणनीतिक और राजनयिक कारणों से  किया है |

”लीबिया” बनने के डर से सावधानी

ट्रंप प्रशासन के अंदर संकेत मिले हैं कि उन्हें लीबिया में हुई नाटो कार्रवाई के बाद देश के टूटकर अस्थिर हो जाने का खौफ है| ट्रंप ने इस बात को स्पष्ट किया है कि अगर ईरान के सर्वोच्च नेता कमिनाई गिर गए तो एक लीबिया जैसी अराजकता पैदा हो सकती है, जो मध्य पूर्व में व्यापक अशांति और वैधता संकट पैदा करेगी  |

राज नायक संवाद की संभावना

राष्ट्रपति और उनका प्रशासन मानते हैं, कि अभी ईरान के साथ वार्ता की एक छोटी खिड़की खुली हुई है यूरोपीय प्रतिनिधियों से जेनेवा में बातचीत हो रही है और व्हाइट हाउस चाहता है कि बरामदगी से पहले कोई राजनयिक ऑर्डर हो जाए |

अंदरुनी राजनीतिक और मीडिया रणनीति

ट्रंप अक्सर बड़ी विवादास्पद घोषणाओ को ‘दो हफ़्ते’ का समय देकर टाल  देते हैं- चाहे वह यूक्रेन व्यापार नीतियां हो या स्वास्थ्य सुधार इससे वह दबाव को नियंत्रित रख सकते हैं और साथ ही स्थिति के बदलते मिजाज को भी देख सकते हैं|

उस रणनीति विकल्प का उपयोग

ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने फोर्डो जैसे किलेबंद परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाने की हमले की योजना मंजूर की है लेकिन अंतिम आदेश देने से पहले वह इंतजार कर रहे हैं कि क्या ईरान व्यवहार में बदलाव लाएगा|

ट्रंप का 2 हफ्ते का इंतजार असल में तीन रणनीतिक कारणों लीबिया जैसी अस्थिरता का डर राजनयिक  रास्ता खुला रहना और आंतरिक विदेशी दबाव के तहत लिया गया एक सुनियोजित निर्णय है वह युद्ध की बजाय वार्ता के विकल्प को प्राथमिकता दे रहे हैं लेकिन, अंतिम त्वरित कदम के लिए तैयार है|

इजरायल ने एक बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक अभियान शुरू किया जिसमें नैटान्ज़,तेहरान और इरफान में परमाणु और मिसाइल सुविधा रडार सिस्टम IEGC कमांड सेंटर आदि को निशाना बनाया गया|
इस हमले में सुरक्षा बलों और वैज्ञानिकों सहित भारी क्षति हुई इसराइल के अनुसार 100+सट्रैटिजिक साइट्स तबाह हुईं

इससे हाथ ही मोसाद ने ड्रोनो से इन हमलों को तारकीय  रूप से सपोर्ट किया, हवा बचाने के लिए एयर डिफेंस सिस्टम को पहले ही डैमेज कर दिया गया|

ईरान ने ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल से इसराइल पर हमला किया जिसमें बेएरशेबा के सोरोगाअस्पताल को सीधे निशाना बनाया गया: 50 + लोग घायल तथा काफी नुकसान हुआ|

कुल मिलाकर लगभग 400 मिसाइल लॉन्च हुई हालांकि इसराइल के सतत सुरक्षा प्रयासों से कुछ रोकी गई फिर भी 240 से अधिक घायल हुए|

अमेरिका द्वारा GBU57 बंकर बस्टर बम की संभावित तैनाती का संकेत दिया गया_ इससे स्थिति और संवेदनशील बन गई|
ईरान के” एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस’ गठबंधन है (हिजबुल्लाह हमास हूथी और इराकी) मलेशिया ज्यादातर जिसमें सक्रिय नहीं है, अपने बचाव के लिए चुप्पी अपनाए हुए हैं|

.रूस ने चेतावनी दी है कि खामेनी की हत्या सहित किसी बड़े कदम से पंडोरा बॉक्स खुल सकता है|

.तेहरान में नागरिकों ने बड़ा  पलायन शुरू कर दिया है _शनिवार 13 जून की स्ट्राइक के बाद सड़कों पर भीड़, ईंधन की कमी, और इंटरनेट बंद होना सामान्य  स्थिति बन गया|

.इजराइल में अस्पताल पर हुए हमले को युद्ध अपराध माना गया, इस पर अंतरराष्ट्रीय चिंता, मानवाधिकार समूहो  की निंदा बढ़ी|

.तेल की कीमतों में उछाल आया, क्षेत्र में स्थिरता की स्थिति बिगड़ी|

.इसराइल दावा कर रहा है कि वह बिना अमेरिका की मर्जी के भी सभी परमाणु ठिकानों पर हमला कर सकता हैनाफ्ता पर सख्त रुख अपनाया जा रहा है|

.अमेरिका  और यूरोपीय देश (जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन) G7 और जेनेवा में अंतरराष्ट्रीय वार्ता और शांतिपूर्ण समाधान की पैरवी कर रहे हैं|

. इसराइल ने इराक, ईरान और परमाणु ढांचे पर सटीक हवाई हमले किए है |

. ईरान ने मिसाइल और ड्रोन से अल्पकालिक आक्रामक  पलटवार किया_ जिसमें  सोरोगा अस्पताल हमले जैसे गंभीर केस शामिल हैं|

.बल्कि मोसाद की ड्रोन-सबैजाज व एयरस्ट्राइक संयोजन ने इस युद्ध को एक नए “हाइब्रिड युद्ध” स्तर पर ले जाया है।

 

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