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हार्ट अटैक कब-कैसे होता है और कैसे बचें – सम्पूर्ण मार्गदर्शिका

हार्ट अटैक (Myocardial Infarction) तब होता है जब आपकी दिल की मांसपेशियों (मायोकार्डियम) को पहुँचने वाला रक्त अचानक रुक जाता है, जिससे ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और मांसपेशी की कोशिकाओं की मृत्यु शुरू हो जाती है |


 कब और कैसे होता है?

1. एथरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis) — प्लाक का निर्माण

  • धमनियों की दीवारों में वसा, कोलेस्ट्रॉल और अन्य पदार्थ जमा हो जाते हैं, जिन्हें “प्लाक” कहते हैं। यह प्रक्रिया दशकों तक धीमी गति से बढ़ती रहती है

  • जब यह प्लाक टूट जाता है तो साइट पर थक्का (क्लॉट) बन जाता है

2. रक्त का प्रवाह रोकना

  • थक्का धमनी को पूरी तरह (स्तंभन) से अवरुद्ध कर देता है।

  • जिसके परिणामस्वरूप दिल की मांसपेशी तक रक्त नहीं पहुँच पाता और 15–30 मिनट के भीतर नुकसान शुरू हो जाता है

3. कम सामान्य कारण

  • धमनी के संकुचन (vasospasm) — जैसे तीव्र कॉर्पोनरी स्पैज्म

  • SCAD — धमनी की अचानक आंतरिक परत का फटना

  • कोरोनरी माइक्रोवेस्कुलर डिस्फंक्शन, थक्का बाहरी स्रोत से, या संक्रमित स्थिति


मुख्य जोखिम कारक

  1. उम्र (>45 वर्ष पुरुष, >55 वर्ष महिलाएँ)

  2. उच्च रक्तचाप, डायबिटीज़, ऊँचा कोलेस्ट्रॉल

  3. धूम्रपान

  4. मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता

  5. पारिवारिक इतिहास

  6. तनावपूर्ण जीवनशैली

  7. विशेष रूप से SCAD में युवा महिलाएँ अधिक प्रभावित


 लक्षण (Symptoms)

  • छाती में दर्द या भारीपन – सबसे सामान्य लक्षण, जो कंधा, बाजू, गर्दन, जबड़े या ऊपरी पेट में फैल सकता है

  • ** सांस फूलना**, चक्कर, ठंडा पसीना, उल्टी/मतली, असामान्य थकान

  • महिलाएँ गर्दन, पेट, पीठ दर्द, मतली/थकावट जैसी भिन्नताएँ दिखा सकती हैं

  • कुछ मामलों में लक्षण नहीं भी होते — इसे ‘साइलेंट MI’ कहते हैं, जो अक्सर अधिक उम्र वालों या डायबिटीज़ वाले लोगों में होता है


 क्या करें — तुरंत चिकित्सा ज़रूरी

  1. लक्षण दिखते ही तुरंत इमरजेंसी (डायल 112/911) कॉल करें।

  2. अस्पताल में ECG, ट्रोपोनिन ब्लड टेस्ट, और एंजियोग्राफी करवा कर रुकावट की पहचान करें

  3. ज़रूरत पड़ने पर थ्रोम्बोलिसिस या PCI (स्टेंट की प्रक्रिया) तुरंत करें

    4. यदि उपलब्ध हो तो एस्पिरिन (च्यू करने योग्य, लगभग 300 mg) लें — उपचार को प्रारंभ करने में मदद मिलती है

 सारांश

चरण क्या होता है
1. प्लाक बनना धमनियों में वसा जमा होती है
2. प्लाक का फटना थक्का बनना शुरू होता है
3. रक्त प्रवाह रुकना दिल की मांसपेशी को ऑक्सीजन नहीं मिलता
4. कोशिका मरना शुरू दिल की कार्यक्षमता प्रभावित होती है

🩺 यदि छाती में अचानक दबाव, सांस फूलना, पसीना आदि लक्षण दिखें, तो देरी न करें—जीवन रक्षा की दृष्टि से तत्काल चिकित्सक मदद लें।


 1. संतुलित और पौष्टिक आहार अपनाएं

  • फल, हरी सब्ज़ियाँ और साबुत अनाज का सेवन करें। ये एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर से भरपूर होते हैं, जो दिल की सुरक्षा करते हैं।

  • ओमेगा-3 फैटी एसिड युक्त खाद्य पदार्थ जैसे मछली, अलसी और अखरोट हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं।

  • अत्यधिक नमक और चीनी के सेवन से बचें, क्योंकि ये ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को बढ़ा सकते हैं।


 2. नियमित शारीरिक गतिविधि

  • रोजाना कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि जैसे तेज़ चलना, दौड़ना या योग करना हृदय को स्वस्थ रखता है।

  • भोजन के बाद 10 मिनट की सैर ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करती है।


 3. धूम्रपान और शराब से परहेज

  • धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन हृदय की धमनियों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है।


 4. तनाव का प्रबंधन

  • ध्यान, योग और गहरी सांस लेने के अभ्यास तनाव को कम करने में सहायक होते हैं, जिससे हृदय पर दबाव कम होता है।


 5. नियमित स्वास्थ्य जांच

  • ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर के स्तर की नियमित जांच से हृदय रोगों का समय पर पता लगाया जा सकता है।


 6. देसी जूस का सेवन

  • लौकी, खीरा, धनिया और पुदीना से बना देसी जूस कोलेस्ट्रॉल को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करने में मदद करता है। इसे सुबह खाली पेट पीना लाभकारी होता है।


 7. अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों से बचें

  • फास्ट फूड, प्रोसेस्ड फूड और अत्यधिक वसा युक्त खाद्य पदार्थ हृदय स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं। इनसे परहेज करें।


 8. पर्याप्त और गुणवत्ता पूर्ण नींद

  • रोजाना 7-9 घंटे की नींद हृदय स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। नींद की कमी से हृदय रोगों का खतरा बढ़ता है।


 9. स्क्रीन टाइम को सीमित करें

  • अत्यधिक स्क्रीन टाइम तनाव और उच्च ब्लड प्रेशर का कारण बन सकता है। दिन में कुछ समय डिजिटल डिटॉक्स करें।


 10. सकारात्मक जीवनशैली अपनाएं

  • सकारात्मक सोच, सामाजिक संपर्क और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

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